कृषि कितने प्रकार की होती है? How many types of agriculture are there?

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कृषि कितने प्रकार की होती है? How many types of agriculture are there?

कृषि कितने प्रकार की होती है? How many types of agriculture are there?

दोस्तों भारत एक ऐसा देश है जो कृषि मे बहुत लगाब रखता है ओर इसी को देखते हुए आज भारत पूरे देश मे प्रशीध है हम इस लेख मे जानेंगे की भारत मे कितने प्रकार की कृषि की जाती है।

कृषि कई प्रकार की होती है। यहां कुछ प्रमुख प्रकार दिए गए हैं:

1. संयुक्त कृषि: इसमें वनस्पति और पशुओं का पालन किया जाता है। इसमें फसलों की खेती के साथ-साथ गाय, भैंस, मुर्गे, मछली आदि का पालन भी किया जाता है।

2. वनस्पति कृषि: इसमें वनस्पति की खेती की जाती है। इसमें फल, सब्जियां, फूल, औषधीय पौधे आदि की खेती की जाती है।

3. पशुपालन: इसमें पशुओं का पालन किया जाता है। यह गाय, भैंस, बकरी, मुर्गा, मछली आदि की खेती और पालन को सम्मिलित करता है।

4. अधिकृत कृषि: इसमें विशेष तकनीकों का उपयोग करके फसलों की खेती की जाती है। इसमें समय, जल, ऊर्जा आदि की बचत के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

5. जलकृषि: इसमें पानी के ऊपर या नीचे फसलों की खेती की जाती है। इसमें हाइड्रोपोनिक्स, निर्मल जलकृषि, तालाबी कृषि, आदि शामिल हो सकते हैं।

6. जैविक कृषि: इसमें केवल जैविक तत्वों का उपयोग करके फसलों की खेती की जाती है। यह विषाणुमुक्त खेती, जैविक खेती, जैविक खाद आदि को सम्मिलित करता है।

7. विधिक कृषि: इसमें विज्ञान, तकनीक और तालिका का उपयोग करके फसलों की खेती की जाती है। यह आधुनिक उपकरणों, संगठन और प्रबंधन की विशेषताओं का उपयोग करता है।

8. अनुकूल कृषि: इसमें प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करके फसलों की खेती की जाती है। यह जलवायु, मिट्टी, जल, ऊर्जा आदि के संरक्षण और सुरक्षा को महत्व देता है।

9. अनुभवी कृषि: इसमें परंपरागत ज्ञान, अनुभव और स्थानीय मार्गदर्शन का उपयोग करके फसलों की खेती की जाती है। यह स्थानीय जलवायु, मिट्टी और प्रदेश की विशेषताओं को ध्यान में रखता है।

10. विज्ञानिक कृषि: इसमें विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान का उपयोग करके फसलों की खेती की जाती है। यह नवीनतम खेती तकनीकों, जैविक उत्पादन, जेनेटिक इंजीनियरिंग, आदि को शामिल करता है।

दोस्तों यह कुछ प्रकार की कृषि है:

अधिक जाने;

अन्नदाता कृषि: यह मुख्य रूप से खाद्य फसलों की उत्पादन के लिए की जाती है, जैसे कि धान, गेहूँ, जौ, मक्का आदि.

फलों की कृषि: इसमें फलों की खेती जैसे कि आम, सेब, केला, अंगूर, अनार आदि शामिल होती है।

सब्जियों की कृषि: इसमें आलू, गाजर, मटर, प्याज, टमाटर, पालक आदि शामिल होती है।

वनस्पति उत्पादन: यह वनस्पतियों से चिकित्सा, खाद्य और औषधीय पदार्थों की उत्पादन के लिए की जाती है।

वन्यजन्य जीवों की कृषि: इसमें मुर्गा, मछली, बकरी, गाय, बकरी आदि पालन शामिल होता है।

खस्तानी या तंतु कृषि: इसमें फाइबर, कपास, जूट, रेशम की खेती शामिल होती है।

गन्ना कृषि: यह गन्ने की खेती और उससे चीनी का उत्पादन करने के लिए की जाती है।

तेलबीज कृषि: इसमें तिल, सरसों, सूरजमुखी आदि तेलबीजों की खेती शामिल होती है।

फलों के बागवान: यह छोटे-छोटे फलों के पौधों की खेती शामिल होती है, जैसे कि अमरूद, नींबू, आंवला आदि।

पशुपालन: यह गाय, बकरी, भैंस, बकरा, बत्ख आदि पालन की जाती है जिनसे दूध, मांस और उनके उपादान बनाए जाते हैं।

मत्स्यपालन: इसमें मछलियों की पालन और उत्पादन शामिल होता है, जिससे प्रोटीन की आपूर्ति होती है।

श्रमिक कृषि: इसमें खेतों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए की जाने वाली कृषि शामिल है।

खड़ी बुआई: यह समुद्र में पौधों की बुआई के लिए की जाती है जिससे समुद्री फसलों का उत्पादन होता है।

अकृषि: कुछ क्षेत्रों में कृषि के अलावा पशुपालन और अन्य गतिविधियों पर भी आधारित जीविकोपार्जन की जाती है।

जलवायु उपाय कृषि: इसमें विशेष जलवायु शर्तों में उपयुक्त फसलों की खेती की जाती है, जैसे कि खरपतवारी कृषि, आलवा कृषि आदि।

आधुनिक कृषि: इसमें उन तकनीकों का प्रयोग होता है जो उत्पादन और प्रबंधन में सुधार करते हैं, जैसे कि कृषि मशीनरी, जल संसाधन प्रबंधन, जैविक खेती, हाइड्रोपोनिक्स आदि।

वास्तविकता में इससे भिन्न अनेक प्रकार की कृषि विशेषज्ञता और विभिन्न जलवायु, स्थानीय और सांस्कृतिक में होती है।

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